वाल्मीकीय रामायण में समागत भौगोलिक परिस्थितियों का विवेचन
Author(s): डॉ. बिंदू राजपूत
Publication #: 2609030
Date of Publication: 07.08.2026
Country: India
Pages: 1-6
Published In: Volume 12 Issue 4 August-2026
DOI: https://doi.org/10.62970/IJIRCT.v12.i4.2609030
Abstract
वाल्मीकि रामायण में भारतीय उपमहाद्वीप और उसके आसपास की भौगोलिक स्थितियों (नदियों, पर्वतों, वनों और जनपदों) का अत्यंत यथार्थ और स्पष्ट विवरण मिलता है।प्रमुख नदियाँ (Rivers)-सरयू नदी: यह कोसल राज्य और अयोध्या की मुख्य नदी है, जिसके तट पर पूरी कथा का केंद्र बिंदु है।गंगा और यमुना: राम के वनगमन के दौरान तमसा, गंगा (प्रयाग के पास) और यमुना को पार करने का विस्तृत मार्ग वर्णित है।गोदवार्ती/गोदावरी और नर्मदा: दक्षिण भारत के अरण्यकाल और पंचवटी क्षेत्र में गोदावरी नदी का विशेष महत्व है, जहाँ सीता हरिन की घटना घटी।पर्वत और वन क्षेत्र (Mountains & Forests)चित्रकूट: अयोध्या छोड़ने के बाद राम, सीता और लक्ष्मण ने चित्रकूट पर्वत के शांत वातावरण में अपनी कुटिया बनाई थी।दंडकारण्य: यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र तक फैला हुआ एक विशाल और घना वन क्षेत्र था, जहाँ राक्षस जातियों का प्रभाव था।ऋष्यमूक पर्वत और किष्किंधा: आधुनिक हंपी (कर्नाटक) के पास स्थित किष्किंधा और ऋष्यमूक पर्वत का वानर साम्राज्य दक्षिण भारत की भौगोलिक श्रृंखला का हिस्सा है।भौगोलिक और रणनीतिक महत्तामहर्षि वाल्मीकि ने किष्किंधा कांड (सुग्रीव द्वारा सीता की खोज के लिए चारों दिशाओं में वानर सेना भेजने का निर्देश) में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के भू-भाग, पर्वतों और गुफाओं का क्रमबद्ध विवरण दिया है।यह विवरण केवल काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविक भौगोलिक और पारिस्थितिक तंत्र (Eco-system) का परिचायक है जो प्राचीन भारत की सीमाओं और जनपदों को आपस में जोड़ता है।
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