आधुनिक भारत में व्याप्त सामाजिक समस्याओं के प्रभाव

Author(s): Raju Nain

Publication #: 2608018

Date of Publication: 10.04.2025

Country: India

Pages: 1-6

Published In: Volume 11 Issue 2 April-2025

DOI: https://doi.org/10.62970/IJIRCT.v11.i2.2608018

Abstract

आधुनिक भारत में व्याप्त सामाजिक समस्याएं (जैसे गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, लैंगिक असमानता और जातिवाद) देश के विकास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर व दूरगामी प्रभाव डाल रही हैं।प्रमुख प्रभावआर्थिक असमानता और विकास में बाधा: गरीबी और भ्रष्टाचार के कारण संसाधनों का असमान वितरण होता है, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ती है और समावेशी विकास रुकता है।मानसिक तनाव और अपराध में वृद्धि: बेरोजगारी और असुरक्षा की भावना युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट, डिप्रेशन और छोटे-बड़े अपराधों तथा मादक द्रव्यों के सेवन को बढ़ावा देती है।लैंगिक हिंसा और असुरक्षा: महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और लैंगिक असमानता समाज के आधे हिस्से को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोकती है और सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं।मानव संसाधन का ह्रास: अशिक्षा, बाल श्रम और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण देश की विशाल युवा आबादी एक कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित नहीं हो पाती है।सामाजिक विघटन और तनाव: जातिवाद और सांप्रदायिकता आपसी भाईचारे को कमजोर करते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है और राष्ट्रीय एकता प्रभावित होती है।

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