महाभारत कालीन आख्यान में पात्रों का संवेदनात्मक विश्लेषण: मानवीय चेतना, नैतिक द्वंद्व एवं मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

Author(s): डॉ. कविता सिंह

Publication #: 2607019

Date of Publication: 13.12.2019

Country: India

Pages: 1-15

Published In: Volume 5 Issue 6 December-2019

DOI: https://doi.org/10.62970/IJIRCT.v5.i6.2607019

Abstract

महाभारत भारतीय साहित्य की एक अनुपम महाकाव्यात्मक कृति है, जिसमें मानवीय जीवन, धर्म, नैतिकता, सत्ता, संबंध, संघर्ष तथा भावनात्मक जटिलताओं का अत्यंत व्यापक और यथार्थपरक चित्रण मिलता है। इस महाकाव्य के पात्र केवल ऐतिहासिक अथवा पौराणिक चरित्र नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय संवेदनाओं, मनोवैज्ञानिक द्वंद्वों और नैतिक निर्णयों के जीवंत प्रतीक हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य महाभारत कालीन आख्यान के प्रमुख पात्रों का संवेदनात्मक विश्लेषण करते हुए उनके व्यक्तित्व में निहित भावात्मक, मनोवैज्ञानिक तथा नैतिक आयामों का समग्र अध्ययन करना है। अध्ययन में श्रीकृष्ण, अर्जुन, कर्ण, द्रौपदी, भीष्म, युधिष्ठिर, दुर्योधन, कुन्ती तथा गांधारी जैसे प्रमुख पात्रों के माध्यम से करुणा, त्याग, कर्तव्यबोध, आत्मसंघर्ष, प्रतिशोध, मातृत्व, मित्रता, न्याय तथा धर्म जैसे मानवीय मूल्यों का विश्लेषण किया गया है। यह शोध गुणात्मक एवं व्याख्यात्मक अनुसंधान पद्धति पर आधारित है, जिसमें विषयवस्तु विश्लेषण, भारतीय काव्यशास्त्रीय दृष्टिकोण तथा आधुनिक मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का समन्वित उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि महाभारत के पात्र आदर्श और अनादर्श के द्वैत से परे बहुआयामी मानवीय व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी संवेदनात्मक संरचना आज भी सामाजिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक विमर्शों में समान रूप से प्रासंगिक है। शोध यह भी प्रतिपादित करता है कि महाभारत के पात्रों का संवेदनात्मक अध्ययन न केवल भारतीय साहित्यिक परंपरा की गहन समझ विकसित करता है, बल्कि समकालीन समाज में नेतृत्व, नैतिक निर्णय, पारिवारिक संबंधों, स्त्री-अस्मिता तथा मानवीय मूल्यों के पुनर्मूल्यांकन के लिए भी एक महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रदान करता है। अतः यह अध्ययन महाभारत के पात्रों को केवल पौराणिक संदर्भों तक सीमित न रखकर उन्हें सार्वकालिक मानवीय चेतना और संवेदनात्मक अनुभवों के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है।

Keywords: महाभारत, संवेदनात्मक विश्लेषण, पात्र-विश्लेषण, मानवीय संवेदना, भारतीय काव्यशास्त्र, मनोवैज्ञानिक अध्ययन, धर्म, नैतिकता, भावबोध, महाकाव्य, भारतीय संस्कृति, साहित्यिक आलोचना

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