स्मार्ट सिटी मिशन का नगर निगमों के प्रशासन पर प्रभाव
Author(s): कविता शर्मा
Publication #: 2607017
Date of Publication: 06.03.2026
Country: INDIA
Pages: 1-11
Published In: Volume 12 Issue 2 March-2026
Abstract
भारत में शहरीकरण की तीव्र गति ने शहरी स्थानीय शासन की संस्थाओं, विशेषकर नगर निगमों, पर अभूतपूर्व दबाव उत्पन्न किया है। इसी संदर्भ में जून 2015 में केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी मिशन (SCM) का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य 100 चयनित शहरों में आधारभूत संरचना, तकनीक-आधारित समाधान और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था। प्रस्तुत शोध पत्र राजनीति विज्ञान के दृष्टिकोण से इस प्रश्न की पड़ताल करता है कि स्मार्ट सिटी मिशन ने नगर निगमों के प्रशासन उनकी संस्थागत संरचना, निर्णय-प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी क्षमता तथा लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व — को किस प्रकार प्रभावित किया है।
अध्ययन द्वितीयक स्रोतों — आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रतिवेदन, संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्टें, नीति आयोग एवं कैग के दस्तावेज़, तथा विद्वत साहित्य पर आधारित है, और 2015–16 से 2024–25 की अवधि का विश्लेषण करता है। अध्ययन के निष्कर्ष द्विधात्मक हैं। एक ओर, मिशन ने नगर निगमों में परियोजना-प्रबंधन की संस्कृति, एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्रों (ICCC) के माध्यम से डेटा-आधारित प्रशासन, ई-गवर्नेंस, तथा अधिकारियों की तकनीकी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दूसरी ओर, कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत गठित विशेष प्रयोजन वाहनों (SPV) ने निर्वाचित परिषदों को निर्णय-प्रक्रिया के हाशिये पर धकेल कर 74वें संविधान संशोधन की विकेंद्रीकरण-भावना को क्षीण किया है, जिससे 'तकनीकी-प्रबंधकीय शासन बनाम लोकतांत्रिक स्थानीय स्वशासन' का द्वंद्व उभरा है। पत्र का निष्कर्ष है कि स्मार्ट सिटी मिशन ने नगर निगमों की प्रशासनिक क्षमता का 'आधुनिकीकरण' तो किया, किंतु उनके लोकतांत्रिक 'सशक्तीकरण' के प्रश्न को अनुत्तरित छोड़ दिया; अतः भावी शहरी मिशनों में SPV मॉडल का नगर निगमों में विलय, महापौर-प्रणाली का सुदृढ़ीकरण एवं वार्ड-स्तरीय सहभागिता अनिवार्य किए जाने चाहिए।
Keywords: स्मार्ट सिटी मिशन, नगर निगम, 74वाँ संविधान संशोधन, विशेष प्रयोजन वाहन (SPV), शहरी स्थानीय शासन, विकेंद्रीकरण, ई-गवर्नेंस, उत्तरदायित्व।
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