वाल्मीकि रामायण में कृषि का महत्त्व
Author(s): डॉ. गुंजन गर्ग
Publication #: 2605003
Date of Publication: 05.01.2020
Country: India
Pages: 1-6
Published In: Volume 6 Issue 1 January-2020
Abstract
संस्कृत साहित्य जगत् में महाकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित रामायण आदिकाव्य के नाम से प्रसिद्ध है। यह काव्य अपनी लोकप्रियता के कारण आज भी भारतीय जनमानस में अपनी आदर्श स्थिति बनाए हुए है। भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार तथा भारत की अधिकांश जनता की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है। वाल्मीकि रामायण में रामायणकालीन समाज की समृद्धता का कारण भी वहाँ की समृद्ध कृषि व्यवस्था है। यहाँ के कोषल, मलद, करुष, स्यन्दिका तथा सोन नदी के तट पर बसे जनपद, मधुरपुर जनपद कृषि की उन्नत व्यवस्था के कारण ही समृद्ध थे। यहाँ राजा किसानों की प्रत्येक समस्या का निवारण करते थे और उनको संरक्षण देते थे। रामायण काल में भी ऋतु के अनुसार कृषि की जाती थी। कृषि के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन वर्षा थी। लेकिन साथ ही वर्षा के जल को एकत्रित करने का कार्य भी किया जाता था। यहाँ वर्षा के जल के अतिरिक कुओं, नहरों, बावडियों, जलाशयों तथा बाँध आदि से भी सिंचाई करने का वर्णन प्राप्त होता है। रामायणकाल में भी प्राकृतिक आपदाओं का वर्णन प्राप्त होता है, जो कृषि को प्रभावित करती थी। इस प्रकार रामायणकालीन समाज में कृषि की महिमा का वर्णन करना ही इस शोधपत्र का प्रतिपाद्य विषय है।
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