अष्‍टछाप कृष्‍णकाव्‍य में लोकतत्त्व

Author(s): डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा

Publication #: 2511023

Date of Publication: 15.06.2016

Country: India

Pages: 1-9

Published In: Volume 2 Issue 3 June-2016

Abstract

अष्टछाप कवियों की रचनाओं में लोक-आख्यानों, लोक-गीतों और ग्रामीण जीवन की छाप का विश्लेषण। इसके अतिरिक्त, आप 'चौरासी वैष्णवन की वार्ता' और 'दो सौ वैष्णवन की वार्ता' में वर्णित लोक-जीवन के तत्वों पर भी शोध कर सकते हैं, और अष्टछाप कवियों की भाषा में लोकभाषा और क्षेत्रीयता के प्रभाव की समीक्षा कर सकते हैं, यह स्रोत में उल्लिखित "चौरासी वैष्णवन की वार्ता" और "दो सौ वैष्णवन की वार्ता" का उल्लेख किया गया है। इस आलेख में हम अष्टछाप कृष्ण काव्य में लोककथाओं पर चर्चा करेंगे।

Keywords: अष्‍टछाप कृष्‍णकाव्‍य, लोकतत्त्व, रचनाओं, लोक-आख्यानों, लोक-जीवन, वैदिक युग, कृष्ण भक्ति, प्रेमतत्व निरूपण, भक्ति-प्रताप

Download/View Paper's PDF

Download/View Count: 45

Share this Article