गलवान संघर्ष (2020) और भारत–चीन संबंधों पर उसका प्रभाव: एक राजनीतिक‑वैज्ञानिक विश्लेषण
Author(s): आरती, डॉ. सुनील कुमार जांगीड़
Publication #: 2607014
Date of Publication: 08.02.2026
Country: -
Pages: 1-13
Published In: Volume 12 Issue 1 February-2026
Abstract
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ ने भारत–चीन संबंधों में एक निर्णायक मोड़ उत्पन्न किया। यह 1975 के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर पहला जानलेवा संघर्ष था, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मृत्यु हुई और चीनी पक्ष को भी उल्लेखनीय क्षति पहुँची। इस घटना ने न केवल द्विपक्षीय सैन्य और कूटनीतिक समीकरणों को बदला, बल्कि आर्थिक, प्रौद्योगिकीय, घरेलू राजनीति और जनमत स्तर पर भी गहरे असर डाले।
यह लेख राजनीतिक विज्ञान के दृष्टिकोण से गलवान संघर्ष (2020) की पृष्ठभूमि, उसके तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों तथा भारत–चीन संबंधों में उभरते "नए सामान्य" (New Normal) की विवेचना करता है। अध्ययन में यथार्थवाद (Realism), सुरक्षा दुविधा (Security Dilemma) और सॉफ्ट बैलेंसिंग (Soft Balancing) जैसी अवधारणाओं के माध्यम से सैन्य तैनाती, कूटनीतिक वार्ताओं, आर्थिक नीति‑परिवर्तनों और भारत की बहुपक्षीय/क्षेत्रीय रणनीतियों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः, गलवान संघर्ष ने यह स्पष्ट किया कि सीमा‑विवाद अब भारत–चीन संबंधों की परिधि में नहीं, बल्कि केन्द्र में आ चुका है, और जब तक LAC पर स्थिरता बहाल नहीं होती, तब तक दोनों देशों के बीच "सामान्य" संबंधों की पुनर्स्थापना सीमित और सशर्त रहेगी।
Keywords: गलवान घाटी, भारत–चीन संबंध, LAC, सीमाविवाद, सुरक्षा दुविधा, सॉफ्ट बैलेंसिंग, आर्थिक निर्भरता, राजनीतिक विज्ञान
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