मध्यप्रदेश नगरीय निकाय की वर्तमान स्थिति का अध्ययन बालाघाट जिले की नगरपालिका के विशेष संदर्भ में
Author(s): मोनिका मार्को, डॉ. प्रीति कुशवाहा
Publication #: 2606019
Date of Publication: 08.05.2026
Country: India
Pages: 1-8
Published In: Volume 12 Issue 3 May-2026
Abstract
भारत में नगरीकरण की तीव्र गति ने नगरीय स्थानीय निकायों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। संविधान के ७४वें संशोधन अधिनियम, १९९२ के माध्यम से नगरीय निकायों को स्थानीय स्वशासन की इकाई के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। मध्यप्रदेश में नगरीय प्रशासन नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर परिषद के रूप में त्रिस्तरीय संरचना पर आधारित है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करना तथा बालाघाट नगरपालिका के विशेष संदर्भ में उनकी प्रशासनिक, वित्तीय एवं विकासात्मक भूमिका का मूल्यांकन करना है। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें जनगणना रिपोर्ट, मध्यप्रदेश शासन की रिपोर्टें, नगर प्रशासन एवं विकास विभाग के दस्तावेज, शोध आलेख तथा प्रकाशित पुस्तकों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से ज्ञात होता है कि मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के समक्ष वित्तीय संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित मानव संसाधन का अभाव, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति तथा नगरीय नियोजन जैसी अनेक चुनौतियाँ विद्यमान हैं। बालाघाट नगरपालिका भी इन चुनौतियों का सामना कर रही है, यद्यपि विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं स्थानीय प्रशासनिक प्रयासों के माध्यम से आधारभूत सुविधाओं में सुधार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। अध्ययन निष्कर्ष रूप में यह स्पष्ट करता है कि नगरीय निकायों को अधिक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान कर उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
Keywords: नगरीय स्थानीय निकाय, नगर पालिका, बालाघाट, मध्यप्रदेश, नगरीय प्रशासन, ७४वाँ संविधान संशोधन, स्थानीय स्वशासन, नगरीकरण, नगरपालिका शासन।
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