हिंदी ई-साहित्य का उद्भव और विकास
Author(s): नगेन्द्र सिंह
Publication #: 2602008
Date of Publication: 16.01.2026
Country: India
Pages: 1-4
Published In: Volume 12 Issue 1 January-2026
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र ‘हिंदी ई-साहित्य का उद्भव और विकास’ विषय के अंतर्गत हिंदी साहित्य में डिजिटल माध्यमों के आगमन से उत्पन्न परिवर्तन, उसके स्वरूप, प्रसार और प्रभाव का अध्ययन करता है। सूचना प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और यूनिकोड के विकास ने हिंदी लेखन और पठन की परंपरागत सीमाओं को विस्तृत करते हुए साहित्य को एक नए डिजिटल आयाम से जोडा है। ब्लॉग, ई-पत्रिकाएँ, सोशल मीडिया, ई-पुस्तक मंच, पॉडकास्ट और वीडियो प्लेटफॉर्म जैसे माध्यमों ने हिंदी साहित्य को वैश्विक स्तर पर सुलभ, तात्कालिक और संवादपरक बनाया है।
यह अध्ययन हिंदी ई-साहित्य की अवधारणा, उसके प्रमुख रूपों, मंचों, भाषा-शिल्प में आए परिवर्तन, तथा सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथ ही, पारंपरिक हिंदी साहित्य और ई-साहित्य के तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि ई-साहित्य ने अभिव्यक्ति के लोकतंत्रीकरण, नए रचनाकारों के उदय और पाठक-लेखक अंतःक्रिया को सशक्त किया है। शोध में ई-साहित्य की चुनौतियों जैसे भाषा की शुद्धता, सामग्री की गुणवत्ता, कॉपीराइट, और डिजिटल विभाजन का भी सम्यक विवेचन किया गया है।
अंततः, यह शोध निष्कर्षित करता है कि हिंदी ई-साहित्य साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु स्थापित करते हुए हिंदी भाषा और साहित्य को वैश्विक मंच पर नई पहचान प्रदान की है।
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