कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर व विकसित भारत: पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का विश्लेषण
Author(s): Ankit Jamwal, Dr. Sunita
Publication #: 2509011
Date of Publication: 28.09.2025
Country: India
Pages: 1-8
Published In: Volume 11 Issue 5 September-2025
Abstract
भारत की सामाजिक, आर्थिक, व सांस्कृतिक संरचना को समझते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवदर्शन व अंत्योदय जैसे सिद्धांतो के माध्यम से एक ऐसे विकास की परिकल्पना की जो व्यक्ति के सर्वांगीण कल्याण पर आधारित हो। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी है जब तक पंक्ति के अन्त में खड़े व्यक्ति तक अवसर व सम्मान नहीं पहुँचता। वर्तमान भारत सरकार की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, स्किल इंडिया मिशन, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना आदि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमज़ोर वर्ग तक को सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे विकसित भारत की यात्रा में भागीदार बन सकें।
यह शोध पत्र पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन और आज की नीतियों के बीच वैचारिक संगति को रेखांकित करता है। इसमें यह भी विश्लेषण किया गया है कि कैसे उनके सिद्धांत केवल राजनीतिक घोषणाएँ नहीं बल्कि समग्र और टिकाऊ विकास की नींव हैं। साथ ही साथ यह भी सपष्ट होता है की दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन न केवल आज भी प्रासंगिक है बल्कि विकसित भारत 2047 की अवधारणा का नैतिक व वैचारिक आधार भी है।
इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को वर्तमान योजनाओं से जोड़कर भारत न केवल आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है, बल्कि वह "विकसित भारत" के लक्ष्य की ओर भी सशक्त रूप से बढ़ रहा है।
Keywords: एकात्म मानवदर्शन, अंत्योदय, कौशल विकास, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2047, स्किल इंडिया मिशन, सर्वांगीण विकास, वैचारिक संगति, नीति और दर्शन, सामाजिक सशक्तिकरण
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